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गुरुवार, 22 मार्च 2012

विश्व जल दिवस मनाया गया World Water Day

विश्व जल दिवस मनाया गया World Water Day
आज इमली इको क्लब अलाहर के सदस्यों ने विश्व जल दिवस मनाया। 
इस अवसर पर क्लब सदस्यों ने गावं पालेवाला और कान्जनु में खुद के तैयार किये गए सोख्ता गड्ढों का पुनरावलोकन किया और यह भी गणना के कि जबसे यह दोनों सोख्ता गड्ढे उन्होंने तैयार किये हैं तबसे अब तक कितना व्यर्थ बह  जाने वाला पानी पुनः जमीन में वापस गया। 
Soakage Pit सोख्ता गड्ढा  
एक अनुमानित गणना से द्वारा पता लगाया गया कि दोनों सोख्ता गड्ढो ने गत छह माह में १२००० लीटर पानी को भूमिगत किया। 
एक सोख्ता गड्ढा प्रतिदिन ५०० लीटर व्यर्थ पानी को भूमि में पहुंचाता है और ५ वर्षों तक बिना किसी बड़े रखरखाव खर्च के पानी चूसने का काम करता है। 
आज क्लब सदस्यों को ५ लोगो ने अपने घर व घेर में सोख्ता गड्ढे बनाने का निमंत्रण दिया। 
ग्रीष्मावकाश में इको क्लब अलाहर के सदस्य इनके यहाँ सोख्ता गड्ढे बनायेंगें    
सोख्ता गड्ढे बनाने से यहाँ व्यर्थ पानी के कारण होने वाली कीचड़ की समस्या व सडक टूटने की समस्या से भी बचाव हुआ। 
क्लब बाल सचिव जोनी ने बताया कि उन्होंने आज अलग तरीके से विश्व जल दिवस मनाया आज उनके साथियों ने ग्रामीणों को पानी के निकास पर सोख्ता गड्ढा बनाने की प्रेरणा दी व इस के लाभों से अवगत करवाया। 
विश्व जल दिवस के बारे में बताते हुए क्लब प्रभारी दर्शन लाल ने बताया कि प्रत्यक वर्ष 22 मार्च का दिन जल को बचाने के संकल्प दिवस के रूप में मनाया जाता है, जल जीवन की एक बहुत महत्वपूर्ण आवश्यकता है, छोटे से लेकर बड़े बड़े कार्यों में जल नितांत आवश्यक है, हमारे इलाके में जल की कोई कमी नहीं है परन्तु यदि उचित जल प्रबन्धन ना किया गया तो वह समय दूर नहीं है जब हमे भी भयंकर जल संकट से रूबरू होना पडेगा  हमारे पास जल के उचित प्रबंधन का ज्ञान नहीं है जिस कारण हम जल को व्यर्थ करते है कुछ ऐसी जानकारियाँ दी गयी जिन कार्यों को हम अनजाने में कर रहे है और कीमती जल को बर्बाद कर रहे है|
अपने वाहनों बाईक,कार आदि को धोने में कितना ही शुद्ध जल बर्बाद कर रहें है,पानी संग्रहण टैंक के ओवरफ्लो से पानी की बर्बादी हो रही है,नलों व पाईप लाईनों की लीकेज से पानी की बर्बादी हो रही है |
स्कूल में बच्चों द्वारा ओक(चुल्लू) से पानी पीने से दोगुना जल लगता है और हाथ अच्छी तरह से धुले हुए ना होने के कारण बीमारियों का खतरा अलग से रहता है पानी गिलास से ही पीया जाए|
टूथ ब्रश ओए शेव करते वक्त नल खुला रखने से पानी की बर्बादी हो रही है,नहाने के लिए शावर और बाथ टब के प्रयोग से पानी की बर्बादी हो रही है,धान की साठी फसल लेने के लिए किसान बेइंतहा जल प्रयोग करते है यहाँ जल स्तर नीचे जाने का यह एक मुख्य कारण है |
अध्यापक सुनील कुमार ने बताया कि हमारी पृथ्वी पर एक अरब चालीस घन किलो लीटर पानी है. इसमें से 97.5 प्रतिशत पानी समुद्र में है, जो कि खारा(नमकीन)  है, शेष 1.5  प्रतिशत पानी बर्फ़ के रूप में ध्रुवीय प्रदेशों में है। इसमें से बचा 1 % पानी नदी, सरोवर,तलाबो, कुओं, झरनों और झीलों में है जो पीने के लायक है। इस एक प्रतिशत पानी का 60वाँ हिस्सा खेती और उद्योग कारखानों में प्रयुक्त होता है। शेष का 40वाँ हिस्सा हम नहाने, कपड़े धोने,पीने, भोजन बनाने एवं साफ़-सफ़ाई में खर्च करते हैं।
अध्यापक मनोहर लाल जी ने एक रोचक जानकारी देते हुए बताया कि एक  लीटर गाय का दूध प्राप्त करने के लिए 800 लीटर पानी खर्च करना पड़ता है शहरी इलाको में दूध के तबेले यानी डेयरी वाले पशुओ के मल-मूत्र को भी पानी से ही बहाते है जिस कारण वहां एक लीटर दूध के पीछे खर्च जल का अनुपात और भी  बढ़ जाता है, एक किलो गेहूँ उगाने के लिए 1 हजार लीटर और एक किलो चावल उगाने के लिए 4 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इस प्रकार भारत में 83 प्रतिशत पानी खेती और सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है। जल के उचित प्रबंधन के अंतर्गत पीने के लिए मानव को प्रतिदिन 3 लीटर और पशुओं को 50 लीटर पानी चाहिए।
अध्यापिका गगनज्योति ने बताया कि  इज़राइल देश में औसत प्रतिवर्ष 10 सेंमी वर्षा होती है, इतनी ही वर्षा के जल के प्रबंधन से वहां के किसान  इतना अनाज पैदा कर लेता है कि वह उसका निर्यात भी कर लेता है। दूसरी ओर भारत में औसतन 50 सेंटी मीटर से भी अधिक वर्षा होने के बावजूद अनाज की कमी बनी रहती है। भारतीय नारी पीने के पानी के लिए रोज ही औसतन 4 मील पैदल चलती है।
अमर उजाला में छोटी से खबर छपी.......

प्रस्तुति: ईमली इको क्लब रा.व.मा.वि.अलाहर जिला,यमुना नगर हरियाणा  
द्वारा: दर्शन लाल बवेजा(विज्ञान अध्यापक) 

गुरुवार, 24 मार्च 2011

विश्व जल दिवस मनाया गया World Water Day

विश्व जल दिवस मनाया गया World Water Day
आज राजकीय व.मा.विद्यालय अलाहर में इमली इको क्लब के सदस्यों द्वारा विश्व जल दिवस मनाया गया,इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया| विश्व जल दिवस के बारे में बताते हुए क्लब प्रभारी दर्शन लाल ने बताया कि प्रत्यक वर्ष 22 मार्च का दिन जल को बचाने के संकल्प दिवस के रूप में मनाया जाता है, जल जीवन की एक बहुत महत्वपूर्ण आवश्यकता है, छोटे से लेकर बड़े बड़े कार्यों में जल नितांत आवश्यक है, हमारे इलाके में जल की कोई कमी नहीं है परन्तु यदि उचित जल प्रबन्धन ना किया गया तो वह समय दूर नहीं है जब हमे भी भयंकर जल संकट से रूबरू होना पडेगा  हमारे पास जल के उचित प्रबंधन का ज्ञान नहीं है जिस कारण हम जल को व्यर्थ करते है कुछ ऐसी जानकारियाँ दी गयी जिन कार्यों को हम अनजाने में कर रहे है और कीमती जल को बर्बाद कर रहे है|
अपने वाहनों बाईक,कार आदि को धोने में कितना ही शुद्ध जल बर्बाद कर रहें है,पानी संग्रहण टैंक के ओवरफ्लो से पानी की बर्बादी हो रही है,नलों व पाईप लाईनों की लीकेज से पानी की बर्बादी हो रही है |
स्कूल में बच्चों द्वारा ओक(चुल्लू) से पानी पीने से दोगुना जल लगता है और हाथ अच्छी तरह से धुले हुए ना होने के कारण बीमारियों का खतरा अलग से रहता है पानी गिलास से ही पीया जाए|
टूथ ब्रश ओए शेव करते वक्त नल खुला रखने से पानी की बर्बादी हो रही है,नहाने के लिए शावर और बाथ टब के प्रयोग से पानी की बर्बादी हो रही है,धान की साठी फसल लेने के लिए किसान बेइंतहा जल प्रयोग करते है यहाँ जल स्तर नीचे जाने का यह एक मुख्य कारण है |
अध्यापक सुनील कुमार ने बताया कि हमारी पृथ्वी पर एक अरब चालीस घन किलो लीटर पानी है. इसमें से 97.5 प्रतिशत पानी समुद्र में है, जो कि खारा(नमकीन)  है, शेष 1.5  प्रतिशत पानी बर्फ़ के रूप में ध्रुवीय प्रदेशों में है। इसमें से बचा 1 % पानी नदी, सरोवर,तलाबो, कुओं, झरनों और झीलों में है जो पीने के लायक है। इस एक प्रतिशत पानी का 60वाँ हिस्सा खेती और उद्योग कारखानों में प्रयुक्त होता है। शेष का 40वाँ हिस्सा हम नहाने, कपड़े धोने,पीने, भोजन बनाने एवं साफ़-सफ़ाई में खर्च करते हैं।
अध्यापक मनोहर लाल जी ने एक रोचक जानकारी देते हुए बताया कि एक  लीटर गाय का दूध प्राप्त करने के लिए 800 लीटर पानी खर्च करना पड़ता है शहरी इलाको में दूध के तबेले यानी डेयरी वाले पशुओ के मल-मूत्र को भी पानी से ही बहाते है जिस कारण वहां एक लीटर दूध के पीछे खर्च जल का अनुपात और भी  बढ़ जाता है, एक किलो गेहूँ उगाने के लिए 1 हजार लीटर और एक किलो चावल उगाने के लिए 4 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इस प्रकार भारत में 83 प्रतिशत पानी खेती और सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है। जल के उचित प्रबंधन के अंतर्गत पीने के लिए मानव को प्रतिदिन 3 लीटर और पशुओं को 50 लीटर पानी चाहिए।
अध्यापिका गगनज्योति ने बताया कि  इज़राइल देश में औसत प्रतिवर्ष 10 सेंमी वर्षा होती है, इतनी ही वर्षा के जल के प्रबंधन से वहां के किसान  इतना अनाज पैदा कर लेता है कि वह उसका निर्यात भी कर लेता है। दूसरी ओर भारत में औसतन 50 सेंटी मीटर से भी अधिक वर्षा होने के बावजूद अनाज की कमी बनी रहती है। भारतीय नारी पीने के पानी के लिए रोज ही औसतन 4 मील पैदल चलती है।
आज इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले बच्चों शिल्पा,दिव्या,सोनम,रवि,नेहा,दिलबाग,रुबिता,शिवकुमार,मंजुल,मोहित,अंजली दत्त,सोनिया,शुभम को प्रधानाचार्य साहिब सिंह जी ने पुनः पुरस्कार दे कर सम्मानित किया |
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इसी कड़ी में आज 23-03-2011 को  ग्रामीणों को बुला कर सोख्ता गड्डा बनाने बारे प्रेरित किया गया | सभी ने बहुत ध्यान से सोख्ता गड्डा बनाने की विधि को समझा और अपने घर-आंगन में इस को बनाने का निर्णय लिया इस अवसर पर प्राध्यापक संजय शर्मा ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि जो भी इसको अपने घर-आंगन में बनाएगा उस को कोई भी समस्या आने पर सारा तकनीकी ज्ञान मौके पर कल्ब प्रभारी द्वारा प्रदान किया जाएगा |
इस अवसर पर विद्यालय के सभी अध्यापको/प्राध्यापकों सुनील कम्बोज,मुकेश रोहिल,संजय शर्मा,सुभाष काम्बोज,रविन्द्र सैनी,मनोहर लाल,संदीप जी का योगदान सराहनीय रहा |
प्रस्तुति:- इमली इको क्लब रा.व.मा.वि.अलाहर,जिला यमुना नगर हरियाणा
द्वारा--दर्शन लाल बवेजा(विज्ञान अध्यापक)

रविवार, 2 जनवरी 2011

विश्व जल दिवस World Water Day

               विश्व जल दिवस
               World Water Day
                     Lecture on world water day
                        DATED:-22-03-2010
                            
            LECTURE DELIVERED BY Mr.Darshan Lal Science Master
    What is the importance of water in every day life ?
         इंसानी जीवन की बुनियादी जरूरतों में पानी
इंसानी जीवन की बुनियादी जरूरतों में पानी को शुमार करना गलत नहीं होगा। लोगों को अगर भोजन नहीं मिले तो वे कुछ दिन तक जिंदा रह सकते हैं लेकिन पानी के बगैर कुछ घंटे काटना भी बेहद मुश्किल होता है। भारत में आजादी के बाद से कई क्षेत्रों में जल संकट गहराता जा रहा है। देश के एक बड़े तबके को पीने का साफ पानी नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, कई क्षेत्र वैसे भी हैं, जहां पीने के पानी की कोई दिक्कत नहीं है। इसके बावजूद बड़े-बड़े महानगरों से लेकर छोटे-छोटे कस्बों तक में पीने के पानी का संकट गहराता ही जा रहा है।
इस बात में तो किसी को कोई संदेह नहीं है कि जल प्रदूषण काफी तेजी से फैल रहा है। सरकारी आंकड़े भी बताते हैं कि शहरी घरों से जितना कचरा निकल रहा है उसके 80 फीसद से ज्यादा की निस्तारण की क्षमता भारत के पास नहीं है। इसके अतिरिक्त औद्योगिक कचरे और भी चिंता बढ़ा रहे हैं। इसमें से ज्यादातर कचरा किसी किसी तरह से पानी में ही मिल रहा है और जल प्रदूषण काफी तेजी से फैल रहा है। कचरे का निस्तारण नहीं होने की वजह से जमीन के अंदर का पानी भी दूषित हो रहा है।
 आज विश्व जल दिवस है। जो संकट आने वाला है क्या वह थम जाएगा? यह सोचने का विषय है। सिर्फ सरकार ही नहीं आम आदमी को भी जागना होगा। सरकार की कोई भी योजना और नीति तब तक सफल नहीं हो सकती जब तक कि आम आदमी उसमें शामिल हो। ऐसी ही योजना कुछ पानी को लेकर भी बनानी होगी। अन्यथा पहले की तरह नीतियां तो बनेंगी लेकिन सिर्फ कागजी। अब जरूरत है नीयत बनाने की। क्योंकि जब नियत बनेगी तभी नीतियां कारगर होंगी और इसके लिए आज जल दिवस से बढिय़ा अवसर नहीं होगा। सो चलिए नीयत बनाएं, जल बचाएं, कल बचाएं।
जल के संरक्षण हेतु कुछ नियमः
(1) बाग़ीचों की सींचाई सुबह अथवा संध्या में पतले पाईप से की जाए तो बहुत हद तक पानी की बचत की जा सकती है।
(2) गाड़ियों को पाईप से धोने की बजाए बाल्टी अथवा डोल से धोया जाए।
(3) ब्रष करते समय, चेहरा बनाते समय, बर्तन धुलते समय नल को खुला रखने से बचें। उसी प्रकार काम होने के बाद नल को अच्छी तरह बंद कर दें। यदि प्रयोग किए गए जल को किसी अन्य काम में लाना सम्भव हो तो ला लें।
(4) गिरने वाले थोड़े बुंद से जल का अधिक मात्रा नष्ट हो जाता है। यदि पूरे दिन पानी के बूंद गिरते रहें तो एक दिन में अनुमानतः 27 लीटर पानी नष्ट होता है।
                           प्रस्तुति:- ईमली इको क्लब रा.व.मा.वि.अलाहर जिला,यमुना नगर हरियाणा            
                           द्वारा--दर्शन लाल बवेजा(विज्ञान अध्यापक)